Swati Kumar's Blogs

Swati Kumar's Blogs
a really warm welcome to my world of words, my emotions.

Oct 19, 2007

शब्दों की दुनिया से मैंने सीखा है

शब्दों की दुनिया से मैंने सीखा है
शब्द जैसे खो गए थे,
अब भी ढूंढ रहे है मुझे
और शायद वो भी,
मुस्कुराते है देखकर मुझे,
शब्दों से सीखा है एक नया सबक,
उनकी महानता की मिलती है झलक.
शब्दों की है एक असीम दुनिया
किसी शब्द में नही दूरिया
करीब आकर वो एक नया रूप लेते है
बिछड़कर वो सिर्फ अक्षर ही रहते है.
कितना है अपनापन इनमें
के इनका कोई अस्तित्व नही अकेले,
अक्षर मिलकर शब्द बनाते हैं,
शब्द वाक्यों में
ढल जाते है
कभी कभी पूरी कविता,
और कभी एक महाग्रंथ.
उन अक्षर जैसे हम इन्सान,
क्यों दूरियों की पूजा करते हैं,
कोई करीब होता है तो हम उससे डरते हैं,
क्या शब्द, क्या वाक्य,
क्या कविता या महाग्रंथ
अक्षर जैसे महीन होकर भी
हम ढूंढते हैं जीने का मंत्र.
मंत्र तो मन में है
वो मन जो कोमल कली की तरह
माँ ने सहलाहा था
और कोमल मन जानता है वो सब
जो कुछ माँ ने बताया था.
कहती है माँ के हम दुनिया के किताब में
है केवल एक सुक्ष्म अक्षर से
कोई वजूद नही है हमारा,
न है कोई अस्तित्व बिखर के.



p.s: Image courtesy : Google Search.

4 comments:

sahebali said...

हम दुनिया के किताब में
है केवल एक सुक्ष्म अक्षर से
कोई वजूद नही है हमारा,
न ही कोई अस्तित्व है बिखर के
अच्छी कविता

छत्तीसगढिया .. Sanjeeva Tiwari said...

कोई वजूद नही है हमारा .....


स्‍वागत

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. बस एक निवेदन है.

Ravi said...

बहुत अच्छा लिखा है। आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी
और हमें अच्छी -अच्छी रचनाएं पढ़ने को मिलेंगे
बधाई स्वीकारें।
As an opportunity i saw your this creations. In real sense, I have no words to comments that you have written with just a good sense of literature and you used your words where they should be used.
Really i like it and desirous to get your all new creations.
...Ravi
http://meri-awaj.blogspot.com/
http://mere-khwabon-me.blogspot.com/