Swati Kumar's Blogs

Swati Kumar's Blogs
a really warm welcome to my world of words, my emotions.

Jul 29, 2008

Sochte hue yu hi

दुश्मन बढ़ते रहे,
दोस्त घटते रहे,
उम्र बढ़ रही है
हम यही समझते रहे |

किसी की दुआ में मिली मुस्कराहट
किसी के बद-दुआओं के ग़म भी सहते रहे,
तकदीर ने की जब भी कोशिश हमें तोड़ने की,
मिले हालात के हम हस्ते रहे.

कभी हो सकता है यह दौड़ छुट जाए
साथ अभी तक आई हिम्मत कही टूट जाए
मुस्कुराने की मिले वजह तो अच्छा है
कभी हो सकता है आँखों में आंसू आए .

यह सोच रही थी मैं यु ही
के शायद कुछ है जो अब तक खटकता है .

1 comments: