दोस्त घटते रहे,
उम्र बढ़ रही है
हम यही समझते रहे |
किसी की दुआ में मिली मुस्कराहट
किसी के बद-दुआओं के ग़म भी सहते रहे,
तकदीर ने की जब भी कोशिश हमें तोड़ने की,
मिले हालात के हम हस्ते रहे.
कभी हो सकता है यह दौड़ छुट जाए
साथ अभी तक आई हिम्मत कही टूट जाए
मुस्कुराने की मिले वजह तो अच्छा है
कभी हो सकता है आँखों में आंसू आए .
यह सोच रही थी मैं यु ही
के शायद कुछ है जो अब तक खटकता है .
उम्र बढ़ रही है
हम यही समझते रहे |
किसी की दुआ में मिली मुस्कराहट
किसी के बद-दुआओं के ग़म भी सहते रहे,
तकदीर ने की जब भी कोशिश हमें तोड़ने की,
मिले हालात के हम हस्ते रहे.
कभी हो सकता है यह दौड़ छुट जाए
साथ अभी तक आई हिम्मत कही टूट जाए
मुस्कुराने की मिले वजह तो अच्छा है
कभी हो सकता है आँखों में आंसू आए .
यह सोच रही थी मैं यु ही
के शायद कुछ है जो अब तक खटकता है .

1 comments:
Good one Swati...
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