
बचपन से ही अगस्त मेरा अतिप्रिय महिना रहा है | आईये बताऊँ क्यों?
इसकी शुरुआत होती है दोस्ती दिवस से अर्थात Friendship Day. दोस्ती से प्यारा रिश्ता न हुआ है, न होगा | इतना स्वार्थरहित शायद ही कोई रिश्ता हो | साल में एक दिन दोस्तों के साथ, वाह क्या बात है ||
बहुत से मेरे जानकार कहते है, के दोस्ती किसी एक दिन की मोहताज नही होती ... मगर मैं मानती हु , के जब धीरे धीरे आप समय के रथ पर स्वर अपने दोस्तों से दूर हो जाते हैं , और आपकी भागती दौड़ती जिंदगी आपको वक्त नही देती किसी को याद करने का , तब इस एक दिन , आप सब कुछ छोड़ कर दोस्तों को फ़ोन करते हैं , मेसेज भेजते है और शायद डाक द्वारा पत्र और कार्ड भी . इससे अच्छी क्या बात हो सकती है . अगस्त का पहला रविवार होता है दोस्तों के नाम. और फिर जब अगस्त का महिना आगे बढ़ता है, तब आता है आज़ादी दिवस यानि Independence Day.
हलाकि आज के युग में आप आजाद होकर भी काफ़ी हद तक घुलाम है उस एक system के, जिसके लिए ख्वाब देखते हुए हमारे पूर्वज अपनी बलिदानी दे गए . फिर भी एक आजाद देश के नागरिक होने की अनुभूति ही अलग है . एक खुशी , इस बात की, कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की करी हुई मेहनत रंग लायी , अहिंसा के पुजारी महात्मा के अनगिनत अन्शानो से होते हुए हमने यह आज़ादी पायी . आज़ादी दिवस पर मै एक चीज़ को बहुत याद करती हु , वो है लड्डू , बूंदी के ... जो हमें स्कूल में मिलते थे .. क्या अलग सी मिठास होती थी उसमे ..
और आजाद होने की भावना से गुज़रते हुए जब अगस्त का महिना कुछ और आगे बढ़ता है तब आता है एक ऐसा त्यौहार जो बहुत ही प्यारा है , जी हाँ , रक्षाबंधन !!
भाई- बहेन का प्यार . बहुत से घरों में जायदाद में मिलने वाली बहनों की हिस्सेदारी और बीच में आई भाभियों के नखरों के बावजूद , बचपन से जुड़ते -बढ़ते इस रिश्ते को आज भी शान से मनाया जाता है .
दोस्तों का रिश्ता, देश का रिश्ता और रिश्ता भाई बहेन का, है ना काफ़ी कुछ अगस्त के महीने में.. अब आगे क्या??
इन सब रिश्तों की खुशी से सराबोर होने के बाद आता है मेरा ख़ुद का जन्मादीन . बहुत ही स्वार्थी बात है मगर मैं यह मानती हु के जब आप ख़ुद से प्यार करेंगे , तभी आप दूसरो की इज्ज़त कर पाएंगऐ . मैं ख़ुद का बहुत ख्याल रखती हु , मैं हमेशा यह समझने की कोशिश करती हु के मुझे क्या अच्छा और क्या बुरा लगता है , और मैं वो व्यवहार दुसरो के साथ नही करती जो मुझे ख़ुद को बुरी लगती है . मेरे मन से जो मेरी आत्मा का रिश्ता है , उसे मनाते मनाते अगस्त ख़तम हो जाता है .
हर साल इन सब उत्सवों से गुथा हुआ अगस्त का महिना हर साल मेरे लिए उत्साह वर्धक होता है ... खुशिया और दुःख दोनों ही आसपास बिखरे हुए होते हैं , यह हामरी आंखों के देखने का कमाल है के हम क्या देखते है ..
दोस्ती दिवस पर सारे दोस्तों का आभार . जो सहारा जो साथ आप सभी से मिलता है , उसका क़र्ज़ चुकाना नामुमकिन है ...
1 comments:
OMG. I've never seen so much hindi in a blog before. Sorry, It will take me a month to finish reading. I'm very poor in hindi.
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