Swati Kumar's Blogs

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a really warm welcome to my world of words, my emotions.

May 13, 2010

मैं वनराज

ऊपर जलता सूरज, नीचे शीतल जल,
और इनमे कुचाले मारता मैं वनराज निश्छल, 

क्या लेना इससे के गर्मी बढती जाती है,
मुझे नहीं पता मगर माँ यही बताती है,

मैंने देखा है यह के मेरे साथी कम हो रहे हैं,
साथ साथ खेलते कूदते जाने कैसे और कहाँ खो रहे हैं,
यूँ उछलते कूदते जल में विचरते मैं बहुत खुश होता हूँ,

अपनी  ही दिखती परछाई को पकड़ने की कोशिश करता हूँ ||

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